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ज़मी से चॉद को देखा, बढाया हाथ छूने को... A poem on life by Goku.

ज़मी से चॉद को देखा, बढाया हाथ छूने को...

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ज़मी से चॉद को देखा,
बढाया हाथ छूने को,,
कभी उच्छला कभी रोया,
चॉद के पास जाने को,,
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दिवाना था चॉदनी का,
दिवाना था चॉदनी का,
मै रीतो जागा करता था,,
सपनो के जहान मे भी,
तारो के पीछे भागा करता था,,
सडको पे फुदकते हुए,
सपनो मे ही खोया रहता था,,
और
अब जो सो भी जाऊ तो,
मै सपने ठूण्डा करता हूं,,
उन दिनो की यादो को,
दिल ही दिल मे चूमा करता हूं,,
उन दिनो की बात तो,
कुछ और ही थी सायद,,
उन दिनो की बात तो,
कुछ और ही थी सायद,,
कभी rainbow पे चढता था,
कभी तारे पकडता था,,
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अब जो देखू मै चारो तरफ,
अब जो देखू मै चारो तरफ,
बस हजारो दाग है,,
जले हुएे उन सपनो की दिल मे,
बस शुलगती आग है,,
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ढूण्डता हूँ उन दिनो को,
ढूण्डता हूँ उन दिनो को,
दफ्न भी जो हो चुके,,
कब्र तक तो मिलती नही,
जख्म भी अब खो चुके,,
अब खोदता हूँ हर कब्र वो,
बचपन की जिनपे छॉप है,,
देखता हूँ कुछ नही है,
अब सपने वे बे नाम है,,
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सीख लिया है मैेने भी अब,
सीख लिया है मैने भी अब,
मुस्कुरा के बढ़ जाना,,
भूलकर उन सपनो को,
Career की सीडी़ पे चढ़ जाना,,
पर
कुछ कसक तो है कही,
कुछ कसक तो है कही,
आज भी उन सपनो की,,
चॉद तो दिखता है अब भी,
पर चॉदनी का पता नही,,
.
हर एक चहरे पे लगा है,
एक चहरा नया अलग,,
हर एक चहरे पे लगा है,
एक चहरा नया अलग,,
असली चहरे खो गये है,
अब नही आते नजर,,
हर एक चहरे के पीछे छुपी है,
कहानियॉ हजारो नई,,
हर एक चहरे के पीछे छुपी है,
कहानियॉ हजारो नई,,
पर ये कहानी आम है,
जो मिलेगी हर कही...
जो मिलेगी हर कही...
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कवीत की video आप ऊपर देख सकते है!
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